
नेपाल,भारत सिमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी का रिपोर्ट
20/06/2025
काठमाण्डौ,नेपाल – जैसे-जैसे रोपण का समय नजदीक आ रहा है, साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन और एग्रीकल्चर मैटेरियल्स कंपनी की यूरिया खाद बीरगंज सीमा के जरिए आनी शुरू हो गई है।
खाद आपूर्ति की जिम्मेदारी देश की इन दो संस्थाओं को दी गई है, जिनके द्वारा ग्लोबल टेंडर के जरिए आयातित यूरिया धीरे-धीरे आना शुरू हो गया है।
दोनों संस्थाओं के लिए यूरिया की आपूर्ति करने वाली कंपनी सन इंटरनेशनल है। सन द्वारा साल्ट से लाया गया यूरिया खाद का एक रैक मंगलवार को बीरगंज के सिरसिया ड्राई पोर्ट पर पहुंचा।
18,000 टन की इस खेप के तहत बीरगंज प्रांतीय कार्यालय को 7,650 टन खाद मिलेगी, ऐसा बीरगंज के साल्ट के मधेश प्रांतीय कार्यालय के प्रमुख अमोज लामिछाने ने बताया।
भैरहवा प्रांतीय कार्यालय को 5,100 टन और विराटनगर कार्यालय को 5,250 टन खाद मिलेगी। बीरगंज और भैरहवा से खाद बीरगंज सीमा के जरिए आ रही है।
लामिछाने ने कहा कि बुआई का मौसम शुरू होने के बाद से जो खाद आनी शुरू हुई है, उससे घरेलू किसानों की खाद की मांग काफी हद तक पूरी होगी।
उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले खेप से हाल ही में यूरिया खाद मंगाई है। अब इस खेप से खाद काफी हद तक खाद की मांग पूरी होगी।’ इस बीच, कृषि सामग्री कंपनी का यूरिया खाद भी गुरुवार से आना शुरू हो जाएगा। यह जानकारी कंपनी के मधेश प्रांतीय कार्यालय, बीरगंज के सूचना अधिकारी व सहायक प्रमुख पुरुषोत्तम सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि यूरिया खाद लेकर रेलवे रैक सोमवार को कोलकाता बंदरगाह से बीरगंज के लिए रवाना हुई है। सिंह ने बताया कि यह रेलवे रैक गुरुवार तक सीमावर्ती भारतीय शहर रक्सौल रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाएगी। सिंह ने बताया कि इस खेप से 21,500 टन यूरिया खाद मंगाई जाएगी।
इस खाद का एक हिस्सा बीरगंज, भैरहवा और विराटनगर प्रांतीय कार्यालयों को मिलेगा। कंपनी 30,000 टन की एक अन्य खेप से 30,000 टन यूरिया का आयात कर रही है। इनमें से 15,000 टन यूरिया पहले ही छह रेलवे रैक में बीरगंज सीमा पार से प्रवेश कर चुका है और बाकी प्रवेश की प्रक्रिया में है, सिंह ने कहा। इस खेप से उर्वरक विराटनगर से भी आ रहे हैं। सिंह ने कहा कि आने वाले पुराने और नए उर्वरकों से कार्यालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत मधेश, बागमती और गंडकी प्रांतों के डेढ़ दर्जन जिलों में यूरिया उर्वरक की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा, ‘रोपण से पहले यूरिया उर्वरक आने के बाद, हमारे लिए किसानों को उर्वरक की आपूर्ति करना आसान हो जाएगा।’ ‘अगर अब आने वाले उर्वरक की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई, तो रोपण शुरू होने से पहले सभी उर्वरक प्राप्त हो जाएंगे।’



