spot_img
HomeUncategorizedशिव भक्तों के लिए सावन में हरे रंग का महत्व, जानिए पौराणिक...

शिव भक्तों के लिए सावन में हरे रंग का महत्व, जानिए पौराणिक कारण

रतन गुप्ता उप संपादक——- सावन में हरा रंग क्यों पहनते हैं? जानिए शिव और पार्वती का इससे गहरा संबंध, शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा का राज और हरियाली तीज का महत्व इस खास लेख में।शिव भक्तों के लिए सावन में हरे रंग का महत्व, जानिए पौराणिक कारण इस बार सावन का पावन महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है और पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ेगा। कहते हैं, सावन आते ही प्रकृति खुद हरी चुनरी ओढ़कर इतराती है।खेत-खलिहान, पेड़-पौधे, सब कुछ हरियाली से ढक जाता है। इसी वजह से महिलाएं भी इस महीने हरे रंग की चूड़ियां, साड़ियां और बिंदी पहनकर श्रृंगार करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भोलेनाथ और माता पार्वती को हरा रंग क्यों इतना प्रिय है?शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई?पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला, तो भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। इससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।उसी समय, प्रकृति ने हरियाली ओढ़कर शिव की आराधना की और देवी-देवताओं ने भोलेनाथ को जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।हरे रंग का महत्व और आध्यात्मिक रहस्यहरा रंग केवल खूबसूरती का प्रतीक नहीं, बल्कि यह प्रकृति, जीवन और समृद्धि की ऊर्जा भी दिखाता है। शिव को बेल पत्र और धतूरा भी अर्पित किए जाते हैं, जिनकी हरियाली शीतलता और शांति का संदेश देती है।काशी के ज्योतिषाचार्य बलभद्र तिवारी बताते हैं कि हरा रंग बुध ग्रह से जुड़ा हुआ है, और इसे पहनने से बुध देवता प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में सुख और सौभाग्य बढ़ता है।माता पार्वती और सावन का गहरा संबंधमाता पार्वती को धरती और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। सावन में सुहागिनें हरे वस्त्र और श्रृंगार को अपनाकर माता पार्वती की पूजा करती हैं, ताकि अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर सकें।हरे रंग की चूड़ियां, मेहंदी और साड़ियां सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि शिव-पार्वती के प्रेम का भी प्रतीक हैं। मेहंदी का गहरा हरा रंग प्रेम और भक्ति की गहराई को दर्शाता है।हरियाली तीज और सावन का उत्सवसावन में हरियाली तीज और हरियाली अमावस्या जैसे पर्व आते हैं, जिन पर महिलाएं हरे कपड़े पहनती हैं, झूले झूलती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।यह परंपरा न केवल परिवार में सुख-शांति लाती है, बल्कि मन को आत्मिक सुकून भी देती है

RELATED ARTICLES

Most Popular

error: Content is protected !!