दो किलोमीटर दूर कैसे भेजें अपने छोटे बच्चे अभिभावकों का सवाल
विकलांग बच्चों ने भी सुनाई पीड़ा बोले हमारा भविष्य छीना जा रहा है
जनपद महराजगंज के परतावल क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर के खिलाफ ग्रामीणों का जनसैलाब सोमवार को जिला मुख्यालय पर उमड़ पड़ा। अभिभावकों, ग्राम प्रधानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्कूली बच्चों ने डीएम कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर शासन की इस नीति को वापस लेने की मांग की। छोटे-छोटे बच्चों को दो से तीन किलोमीटर दूर भेजना अमानवीय है प्रदर्शन में शामिल एक अभिभावक ने गुस्से में कहा। उनका कहना था कि बिना किसी समुचित परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था के इतने छोटे बच्चों को दूरस्थ स्कूलों तक भेजना न तो सुरक्षित है और न ही व्यवहारिक। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक ओर सरकार हर गांव में निजी विद्यालयों को बढ़ावा दे रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी
विद्यालयों को मर्ज कर बंद किया जा रहा है। इससे गरीब, वंचित और विकलांग वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
हम जैसे विकलांग बच्चों के लिए नजदीकी स्कूल ही एकमात्र सहारा था एक दिव्यांग छात्र ने रोते हुए कहा सरकार ने वह भी छीन लिया। अब हम कैसे पढ़ाई करेंगे? गांव के कई मासूम बच्चे अपने बंद पड़े स्कूलों के गेट पर पहुंच कर फूट-फूट कर रोते देखे गए। कुछ बच्चों की मानसिक स्थिति तक प्रभावित हो गई है। यह दृश्य हर संवेदनशील नागरिक के हृदय को झकझोर देने वाला है। ग्राम प्रधानों ने स्पष्ट कहा कि यदि मर्ज किया जाना अनिवार्य है तो सरकार पहले परिवहन, सुरक्षा और सहायक शिक्षकों की समुचित व्यवस्था करे। वरना मूल विद्यालय को पुनः संचालित किया जाए।
अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने शीघ्र इस मामले में कोई समाधान नहीं निकाला तो यह आंदोलन जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक उग्र रूप धारण कर लेगा।




