सह संपादक डॉ. योगेन्द्र पाण्डेय की रिपोर्ट

महराजगंज जनपद के विकास खंड सिसवा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मथनिया में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत फल और दूध के वितरण में भारी लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान द्वारा अक्टूबर 2025 तक बच्चों को फल और दूध उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसकी पुष्टि स्वयं विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा की गई है।
इस गंभीर प्रकरण को लेकर जिला पंचायतराज अधिकारी महराजगंज से प्रधान के विरुद्ध पंचायतीराज अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई करने की मांग की गई है। समाजसेवी संगठन ने इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाते हुए कहा है कि सरकार की महत्वाकांक्षी “फल-दूध वितरण योजना” बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी है, लेकिन मथनिया के प्रधान द्वारा इसकी निरंतर अनदेखी की जा रही है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (डीबीएसए) रिद्धी पांडेय द्वारा जारी रिपोर्ट (पत्रांक 13927/25 दिनांक 07.11.2025) में स्पष्ट किया गया है कि 01 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2025 तक कई विद्यालयों में फल और दूध का वितरण नहीं कराया गया। इस सूची में कॉम्पोजिट विद्यालय मथनिया का नाम भी शामिल है। अधिकारी ने इसे सरकार की प्राथमिकता योजना में बाधा डालने वाला कदम बताया है और प्रधान को जिम्मेदार ठहराते हुए आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की है।
प्रधानाध्यापक अनिल कुमार चौरसिया ने भी अपने स्पष्टीकरण पत्र में स्वीकार किया है कि विद्यालय में फल और दूध का वितरण ग्राम प्रधान के माध्यम से होता है, परन्तु कई बार अनुरोध करने के बावजूद प्रधान ब्रम्हा नन्द पटेल ने दूध का वितरण नहीं कराया। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इस लापरवाही के कारण उनका वेतन भी अस्थायी रूप से रोका गया था, जिसे बाद में बहाल किया गया।
इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि शासन की पोषण सुधार योजना को पंचायत स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। बाल पोषण से जुड़ी यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए बनाई गई थी, मगर इसकी अनदेखी प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने न केवल रिपोर्ट जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को भेजी है, बल्कि यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक सोमवार को विद्यालयों में अनिवार्य रूप से फल वितरण कराया जाए और किसी भी प्रकार की चूक पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि मथनिया ग्राम पंचायत के प्रधान के विरुद्ध जिला प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है और बच्चों के हित में बनी इस योजना को जमीन पर कैसे उतारा जाता है।
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