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नेपाल में फिर भड़का Gen Z का विरोध, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले, की हवाई फायरिंग, कई घायल भारतीय व्यापारी नेपाल छोड़ कर भागे

रतन गुप्ता वरिष्ठ संपादक—– नेपाल में Gen Z युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के कारण हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. प्रशासन ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया है. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बुधवार को हुई झड़पों के संबंध में नामित व्यक्तियों को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद आज ये हिंसा भड़क गई नेपाल में व्यापार करने वाले नेपाल छोड़ कर भागे सोनौली बार्डर पर भागने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है ।नेपाल में एक बार फिर Gen-Z युवाओं के विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में तनाव बढ़ गया है. बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने गुरुवार को कई संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सिमारा चौक पर इकट्ठा हुए. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और बाद में क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया. बताया गया है कि सिमारा एयरपोर्ट के पास टकराव बढ़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और हवाई फायरिंग की. झड़पों में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. इन झड़पों के बाद एयरपोर्ट पर परिचालन को रोकना पड़ा. कर्फ्यू दोपहर 12:45 बजे से लागू हुआ और रात 8 बजे तक जारी रहने की संभावना है.Gen-Z समूह ने आरोप लगाया है कि पुलिस बुधवार को हुई झड़पों से जुड़े मामलों में नामित आरोपियों को गिरफ्तार करने में विफल रही. 19 नवंबर को सिमारा एयरपोर्ट के पास हुई झड़प में 6 Gen-Z समर्थक घायल हुए थे जिसके बाद समूह ने 6 UML कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. रिपोर्ट के अनुसार, तनाव तब बढ़ा जब UML (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) नेताओं ने 5 मार्च 2026 को प्रस्तावित चुनाव से पहले जिले का दौरा करने की योजना बनाई. सितंबर में भड़की हिंसा में गई थी 76 लोगों की जानबता दें कि ये प्रदर्शन नेपाल में सितंबर में भड़की भीषण झड़पों के लगभग 2 महीने बाद हुआ है जिसमें 76 लोग मारे गए थे. इन विरोध प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री और यूएमएल के अध्यक्ष केपी ओली को अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था. ओली के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद 12 सितंबर को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ था जिन्होंने नियुक्ति के दिन ही संसद को भंग करने की सिफारिश की और नए चुनाव कराने का आह्वान किया था

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