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लैंगिक समानता हेतु प्रावधानों एवं प्री-लिटिगेशन स्तर पर विवादों के निवारण विषय पर किया गया विधिक साक्षरता / जागरूकता शिविर

गोरखपुर संवाददाता जितेंद्र यादव की रिपोर्ट

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की कार्ययोजना वर्ष 2024-2025 के क्रियान्वन के क्रम में तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण / जनपद न्यायाधीश  तेज प्रताप तिवारी के कुशल निर्देशन में आज  लैंगिक समानता हेतु प्रावधानों एवं प्री-लिटिगेशन स्तर पर विवादों के निवारण विषय पर विधिक साक्षरता / जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन डी०ए०वी० पी०जी० कॉलेज, गोरखपुर में किया गया। जिसमें  विकास सिंह, अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोरखपुर के साथ ही साथ कॉलेज के प्राचार्य अध्यापकगण एवं छात्र व छाआऐं उपस्थित रहें।

अपर जनपद न्यायाधीश / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोरखपुर द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को उक्त विषय पर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया गया कि लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकती है। आर्थिक समृद्धि के लिए यह आवश्यक है। जो समाज महिलाओं और पुरुषों को समान मानते हैं वे अधिक सुरक्षित और स्वस्थ हैं। लैंगिक समानता एक मानव अधिकार है तथा प्री-लिटिगेशन से तात्पर्य उस कानूनी प्रक्रिया से है जो मुकदमा दायर होने से पहले होती है। जिसमें पक्षकार प्री-लिटिगेशन स्तर पर अपने मामले को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण करा सकते है एवं मुकदमे के लम्बी प्रक्रिया से बच सकते है।

इसके अतिरिक्त अपर जनपद न्यायाधीश / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोरखपुर द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ द्वारा संचालित किये जा रहे विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के बारे में भी बताया गया तथा आज जनपद गोरखपुर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी बताया गया गया। यह जानकारी  विकास सिंह, अपर जनपद न्यायाधीश / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गोरखपुर द्वारा दी गयी।

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