
सीमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
11/07/2025
काठमाण्डौ,नेपाल — आज विश्व जनसंख्या दिवस है। संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर दुनिया के विभिन्न देशों में इस दिन को विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व की जनसंख्या को एक अरब तक पहुँचने में लाखों वर्ष लगे, लेकिन अगले 200 वर्षों में विश्व की जनसंख्या सात गुना बढ़ गई।
2011 में विश्व की जनसंख्या सात अरब तक पहुँच गई, और 2021 में यह सात अरब तक पहुँच गई।
जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि 2030 में यह आठ अरब 50 करोड़, 2050 में नौ अरब 70 करोड़ और 2100 में दस अरब 90 करोड़ तक पहुँच जाएगी।
एक अध्ययन से पता चला है कि प्रजनन दर में बदलाव, बढ़ते शहरीकरण और प्रवास का जनसंख्या वृद्धि पर दूरगामी प्रभाव पड़ा है।
अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार, आर्थिक अभाव, असुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास को देखते हुए, प्रजनन आयु के युवाओं में पहले की तुलना में बच्चे पैदा करने की इच्छा कम हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष द्वारा चौदह देशों के 14,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रजनन आयु के अधिकांश वयस्क अपनी इच्छानुसार बच्चे पैदा नहीं कर पाते हैं, जिसके लिए उन्हें बच्चों की देखभाल, नौकरी की असुरक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, महामारी, युद्ध और पर्यावरणीय क्षति जैसी समस्याओं का हवाला देना पड़ता है।
इस दिवस के अवसर पर बोलते हुए, महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और आशावान विश्व के निर्माण में युवाओं का समर्थन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आज जारी एक संदेश में, उन्होंने कहा कि सतत विकास, शांति और मानवीय गरिमा के लिए उनके अधिकारों का समर्थन आवश्यक है। युवाओं को अपनी इच्छानुसार परिवार बनाने के लिए सशक्त बनाना इस वर्ष के जनसंख्या दिवस का विषय है।



