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नकली भारतीय नोट कांड में यूनुस अंसारी रिहा होते ही संपत्ति शोधन मामले में भी जांच शुरू

रिपोर्टर जीत बहादुर चौधरी ,नेपाल —– नकली भारतीय मुद्रा कांड में अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए और सजा काट रहे यूनुस अंसारी के खिलाफ अब संपत्ति शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में भी जांच शुरू होने जा रही है। पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो (CIB) ने अंसारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।ललितपुर के नख्खु स्थित कारागार में बंद अंसारी 6 साल की सजा पूरी कर रविवार को रिहा हो रहे हैं। उनकी रिहाई को ध्यान में रखते हुए CIB ने कारागार प्रबंधन विभाग को एक पत्र भेजकर अंसारी को जांच के लिए उपस्थित कराने का अनुरोध किया है। इसी पत्र के आधार पर रिहा होते ही CIB द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की तैयारी की गई है।अंसारी पहली बार 2066 पौष 13 (नेपाल संवत अनुसार) 28दिसम्बर 2006 को 25 लाख 44 हजार 500 नकली भारतीय रुपये के साथ गिरफ्तार किए गए थे। उस समय वह न्यूज नेपाल नेशनल टेलीविजन के अध्यक्ष थे। इसके बाद 2010 सितम्बर 22 को जब्त किए गए 40 लाख 91 हजार जाली नोटों के मामले में भी उनका नाम आया था। तीसरी बार वह 2014 जनवरी 24 को 35 लाख नकली भारतीय रुपये के साथ पकड़े गए और सजा काट कर रिहा हुए थे। चौथी बार 2019 मई 24 को 7 करोड़ 67 लाख 94 हजार नकली भारतीय रुपये के साथ त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया।अंतिम गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें 6 साल कैद, 60 हजार रुपये जुर्माना और 1300 रुपये क्षतिपूर्ति की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया। उनकी सजा की अवधि 2025 मई 24 तक निर्धारित है।

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