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नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन की दो पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजनाएं कहां तक पहुंचीं?

नेपाल,भारत सिमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी का रिपोर्ट
20/07/2025

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत सरकार के अनुदान से बनने वाली दो पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजनाओं का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ‘सिलीगुड़ी-झापा’ और ‘अमलेखगंज-चितवन’ पेट्रोलियम पाइपलाइनों के निर्माण पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, यह जानकारी कॉरपोरेशन के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने दी।

भारत ने कहा था कि वह सिलीगुड़ी से झापा चराली तक 50 किलोमीटर लंबी पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना बनाएगा और चराली में ही करीब 19,000 किलोलीटर क्षमता वाला ‘स्मार्ट ग्रीनफील्ड टर्मिनल’ बनाएगा।

दोनों पाइपलाइनों और चराली टर्मिनल के निर्माण के लिए जरूरी 15 अरब रुपये भारत अनुदान के तौर पर देगा।

इसी तरह, अमलेखगंज से चितवन लोथर तक 62 किलोमीटर लंबी पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजना बनाने पर पहले ही सहमति बन चुकी है। इस पाइपलाइन का निर्माण आईओसी द्वारा निगम के निवेश से किया जाएगा। प्रवक्ता ठाकुर ने बताया कि इसकी लागत 9.25 अरब रुपये के बराबर है। इसके लिए डिसेम्बर 2024 में आयोजित दोनों संगठनों की ‘संयुक्त संचालन समिति’ की बैठक में ‘सिलीगुड़ी-चाराली’ और ‘अमलेखगंज-लोथर’ पेट्रोलियम पाइपलाइनों को साढ़े 4 साल के भीतर पूरा करने पर सहमति बनी थी। इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए विभिन्न चरणों में चर्चा हुई। चार ‘संचालन बैठकें’ हुईं, दो व्यक्तिगत और दो वर्चुअल।

अब तक सिलीगुड़ी से झापा और अमलेखगंज से चितवन तक पाइप बिछाने के मार्ग का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, निगम के प्रवक्ता ठाकुर ने बताया।

निगम और आईओसी द्वारा किए जाने वाले कार्यों को ‘बी2बी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट’ में ही आवंटित किया गया था। उसमें से ऑयल कॉरपोरेशन को दोनों परियोजनाओं के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण, भूमि भराई और भूमि सीमा चिह्नांकन का काम पूरा करना था और फिर उन्हें आईओसी को सौंपना था।

आईओसी का काम निर्माण का है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है। प्रवक्ता ठाकुर ने ऑनलाइन न्यूज से कहा, ‘अमलेखगंज-झापा के लिए टेंडर आषाढ़ में जारी किया जाएगा और चितवन के लिए भूमि सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। हमें दोनों स्थानों के लिए ईआईए करना था और ईआईए प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है।’

निगम प्रवक्ता ठाकुर ने बताया कि अब तक सिलीगुड़ी से झापा और अमलेखगंज से चितवन तक पाइप बिछाने के मार्ग का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, इस बीच आईओसी के उच्चस्तरीय तकनीशियन आकर स्थान का अध्ययन कर चुके हैं। और उसके आधार पर आईओसी में डिजाइन का काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत से मिली जानकारी के अनुसार, चौथी संचालन समिति की बैठक पूरी होने के बाद मसौदा डिजाइन चरण में है और कुछ निविदाएं तैयार की गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘हमें जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार इंडियन ऑयल दिसंबर 2025 तक झापा में पेट्रोलियम के लिए टेंडर कर देगा।’ ‘मार्च 2026 तक चितवन के लिए टेंडर कर दिया जाएगा।’

आईओसी ने जल्द से जल्द जमीन सौंपने का अनुरोध किया है। प्रवक्ता ठाकुर ने कहा, ‘पाइपलाइन परियोजना का क्षेत्र बड़ा है, हमें काम को भी बारीकी से देखना है, इसलिए इसमें कुछ समय लगा है।’

‘हम असद के भीतर भूमि भराव और परिसर की सीमा के लिए टेंडर कर रहे हैं। टेंडर मिलने के बाद, बाकी काम इंडियन ऑयल करेगा और काम शुरू कर देगा।’

उनके अनुसार, एक अन्य समझौते के अनुसार, निगम परियोजना के संचालन की सुविधा प्रदान करेगा और न्यूनतम बुनियादी ढांचे की व्यवस्था के लिए एक परियोजना प्रबंधक भी नियुक्त किया गया है।

इंजीनियर सुरेंद्र महतो झापा परियोजना के प्रभारी होंगे और इंजीनियर अभिषेक ठाकुर चितवन परियोजना के प्रभारी होंगे। वे काम को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय, निगम और आईओसी के साथ समन्वय करेंगे।

भारत की ओर से कंट्री मैनेजर निरुपम रायजादा नेपाल का नेतृत्व करेंगे। इसी तरह कॉरपोरेशन के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नेपाल की ओर से मार्केट मैनेजमेंट का नेतृत्व करेंगे।

पिछले सप्ताह कॉरपोरेशन के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बीरेंद्र गोइत के नेतृत्व में प्रोजेक्ट चीफ समेत 6 लोग इस मुद्दे पर चर्चा करने आईओसी पहुंचे थे। गोइत ने कॉरपोरेशन की ओर से पिछली 4 बैठकों का नेतृत्व किया था। गोइत 4 असद से अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर हैं। उनकी जगह नए डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी।

कब हुआ था समझौता? 1 जुन 2023 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम पाइपलाइन के दूसरे चरण के विस्तार पर समझौता हुआ था।

बीटीयू समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ऑयल कॉरपोरेशन और आईओसी दोनों की ओर से एक संचालन समिति का गठन किया गया है।

इसी दौरान दोनों देशों के बीच दो पेट्रोलियम पाइपलाइन और एक टर्मिनल बनाने पर भी समझौता हुआ था। इस समझौते पर तत्कालीन प्रधानमंत्री दहल और उनके भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी ने हस्ताक्षर किए थे। 2019 में भारत ने प्रथम चरण के अंतर्गत मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन का निर्माण पूरा किया।

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