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भारत नेपाल बार्डर से कपड़ों की तस्करी ,अरबों का कारोबार ,पुलिस और एसएसबी को चकमा देकर जमकर तस्करी और कारोबार

रतन गुप्ता उप संपादक—–भारत नेपाल बार्डर से इस समय जम कर कपड़ों का करोबार जारी बाहर से तस्कर करोबारी आकर अरबों के कपड़े नेपाल भेज रहे । कपड़ों के तस्करों को कैसे पकड़ा जाय पुलिस और एसएसबी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है । भारतीय क्षेत्र के कपड़ों से नेपाल की होली रंगीन होगी। नेपाल में इन दिनों भारतीय कपड़ों की मांग अधिक है। इसी का फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब अरबों का धंधा होगा। दिल्ली, सूरत, लुधियाना से कपड़ों का खेप सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंच रहा है। बसों में ही छोटे-छोटे बंडल आसानी से मंगाकर नेपाल भेज दिया जाता है।कपड़ों के माया जाल समझने के लिये बार्डर पर अधिकारीयों का बकायदा टेडिग देने पड़े गी इनके मुखबिर भी भाग ये है जो कुछ बताते थे ।सूत्रों की माने तो दूसरे राज्यों से जीएसटी चोरी कर कपड़ों के स्टॉक को सीमावर्ती क्षेत्र में इकट्ठा कर नेपाल भेजा जा रहा है। बीते दिनों कपड़े की बरामदगी के बाद अब जीएसटी विभाग भी ऐसे कई बड़े व्यापारियों को चिह्नित करना शुरू कर दिए हैं, जो इस तरह के धंधे में संलिप्त हैं। दिल्ली से रेडीमेड कपड़े और सूरत की साड़ियां पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंच रही हैं। नेपाल बेलहिया के बलदेव कहते हैं कि त्योहारों में भारतीय कपड़ों की मांग बढ़ जाती है। खासकर साड़ी और लेडिज सूट की मांग अधिक रहती है। होली में तो टी-शर्ट से लेकर अन्य कपड़े मंगाए जा रहे हैं।बीते सप्ताह कस्टम और पुलिस विभाग ने सोनौली के ही अवैध गोदाम से कपड़े बरामद किए थे। इसके बाद पिलर संख्या 519 के निकट रेडीमेड कपड़ों की बरामदगी तस्करी बयां कर रही है। जांच एजेंसियां धंधेबाज तक पहुंचाने के लिए कुंडली खंगालने में लगी हैं। कस्टम विभाग ने बरामद कपड़े के सही कीमत का भी लेखा जोखा तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार अभी तक बरामद कपड़े को लेकर कोई व्यापारी कस्टम से संपर्क नहीं साधा है।देश के विभिन्न राज्यों से खासकर सूरत, लुधियाना एवं पंजाब आदि जगहों से बड़े पैमाने पर आने वाले कपड़ों के कारोबारी नौतनवा सोनौली और सिसवा से जुड़े हैं। भारत से नेपाल जाने वाले कपड़ों को भारत सरकार निर्यात पर टैक्स में छूट देती है, जिसका पूरा फायदा स्थानीय स्तर के अवैध कारोबारी उठते हैं।ट्रांसपोर्ट के जरिए कपड़ा भारत नेपाल सीमा पर पहुंचता तो जरूर है, लेकिन वह भारतीय कस्टम होते हुए नेपाल जाने के बजाय झुलनीपुर, ठूठीबारी, नौतनवा एवं सोनौली के अवैध गोदाम में पहुंच जाता है। जहां से पगडंडी रास्तों के जरिए नेपाल की सीमा में पहुंचा दिया जाता है। यह पूरा तस्करी का खेल ज्यादातर देर रात और सुबह के समय में होता है।बाॅर्डर पार जाते ही तीन गुना हो जाती है कपड़ों की कीमतसूत्रों की माने तो सीमावर्ती क्षेत्र में कपड़ा तस्करी का खेल आराम से हो रहा है। अवैध गोदामों में रखे करोड़ों के कपड़े आसानी से सरहद पार हो जाते हैं। नेपाल के कपड़ा कारोबारी सीमावर्ती बाजार के दुकानदारों से सेटिंग करके सीमा तक कपड़ा मंगवाते हैं। एक नंबर बिल की आड़ में दो लाख की जीएसटी बिल में 10 लाख का कपड़ा मंगाते हैं। इसके बाद उसको नेपाल बाॅर्डर पार ले जाकर खपाया जाता है। 500 रुपये के कपड़े की कीमत बाॅर्डर पार जाते ही तीन गुना हो जाती है। सीमावर्ती कस्बा नौतनवा, सोनौली, खनुवा, भगवानपुर, परसामलिक, बरगदवा, ठूठीबारी और सिसवा तक पर्याप्त मात्रा में कपड़े की छोटी-बड़ी दुकान मौजूद हैं। इन बाजारों में नेपाल और भारत दोनों देश के व्यापारी तथा ग्राहक आते-जाते रहते हैं। ऐसे में बाॅर्डर पर ही कुछ ऐसे लोग भी हैं जो दुकान तो नहीं खोले हैं, लेकिन इस धंधे में शामिल होने के लिए जीएसटी बनवा लिए हैं। जो दिल्ली, सूरत, गुजरात, कलकत्ता सहित अन्य बड़े शहरों से जीएसटी की आड़ में कपड़ों की तस्करी करते रहते हैं।कच्चे बिल पर कपड़ों की होती है बुकिंगनेपाल में कपड़ा तस्करी के लिए एक गिरोह लगा हुआ है। कपड़ा कारोबारी रजनीश निवासी बुटवल ने बताया कि कपड़ा तस्करों के कारण कारोबार चौपट हो गया है। उन्होंने बताया कि गुजरात से कच्चे बिल पर रेलवे में कपड़ों की बुकिंग होती है। कपड़ा नेपाल सीमा पर पहुंचने के बाद नेपाल के प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्र तक ट्रकों से गोरखपुर और फिर नौतनवा सोनौली ठूठीबारी और सिसवा के गोदाम में डंप किया जाता है। फिर छोटे वाहनों से नो मेंस लैंड तक पहुंचाया जाता है। इसके साथ ही भारत के महानगर दिल्ली, कोलकाता, गाजियाबाद, गुजरात, पंजाब से छोटे वाहन एवं रोडवेज की बसों का सहारा लिया जाता है। माल बॉर्डर के आसपास पहुंचने के बाद कच्चे बिल को डिलेवरी करने वाला व्यक्ति वापस लेकर चला जाता है। इसके साथ ही बंडल में 10 लाख के कपड़े होते हैं, लेकिन बिल दो लाख का बनाया जाता है।दोनों देशों के राजस्व को लगा रहे चूनाभारत के साथ ही नेपाल सरकार को भी करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सूत्रों की माने तो बॉर्डर के 10 किमी के दायरे में करीब दो दर्जन से अधिक अवैध गोदाम हैं। गोदाम में बिना ई-वे-विल के सामान डंप होते हैं। भारत से ट्रेडिंग करने वाले व्यापारी मालामाल हो रहे हैं। अवैध रूप से बॉर्डर तक माल पहुंचाने के लिए कार्गो सेवा कंपनी पांच प्रतिशत तक कमीशन लेती है। इसमें 50 हजार रुपये से कम के कई बिल जारी किए जाते हैं। इसके लिए ई-वे-बिल की आवश्यकता नहीं होती है। सामान गंतव्य तक पहुंचते ही बिल कैंसिल कर दिया जाता है। इसके कारण दोनों देश के राजस्व की चोरी की जा रही है।

रतन गुप्ता उप संपादक

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