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महराजगंज जनपद में टारगेट के लिए फर्जी वोटर कार्ड व आधार से एजेंट दिला रहे लोन

रतन गुप्ता वरिष्ठ संपादक————माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज देने में खेल… एक आवेदक की चार से पांच आईडीटारगेट और कमीशन के लालच में एजेंट अधिक से अधिक महिलाओं को दिलाते हैं कर्जप्रक्रिया आसान होने के कारण कर्ज के दलदल में फंसती जाती हैं महिलाएंमहराजगंज। कमीशन के लालच में समूह लोन दिलाने वाले एजेंट फर्जीवाड़ा भी कर रहे हैं। महिलाओं को कर्ज दिलाने के लिए उनकी चार से पांच आईडी बनाकर एजेंट कर्ज दिला देते हैं। एजेंट अपना कमीशन लेकर निकल जाते हैं लेकिन महिलाएं हर कर्ज के दलदल में गहरे धंसती चली जाती हैं। यह जानकारी पीड़ित महिलाओं ने खुद दी है। दस्तावेजों के तकनीकी दांव-पेंच से अनभिज्ञ महिलाएं एजेंटों की बातों में आ जाती हैं। जब तक उन्हें सच्चाई पता चलती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।परतावल क्षेत्र में बीते दिनों में कर्ज में डूबी सब्या की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही क्षेत्र में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेने वाली महिलाएं एजेंटों की करतूत बयां कर रहीं हैं। अब तक तो वसूली के लिए दबाव बनाने की बात सामने आई थी लेकिन अब महिलाओं की बातों पर यकीन करें तो सीधे तौर पर फर्जीवाड़े की बात सामने आ रही है। निर्वाचन से लेकर आधार कार्ड तक फर्जी बनाकर कर्ज दिया जा रहा है। मोहद्दीनपुर बनकटिया गांव में पड़ताल के दौरान पहले तो महिलाएं सच बताने से परहेज कर रहीं थीं। जब महिलाओं को भरोसा हो गया कि उनकी बात उचित फोरम तक पहुंचेगी तो एक-एक अपना दुख दर्द सांझा करने लगीं।गांव की राबिया ने डेढ़ लाख रुपये कर्ज लेकर बेटे को सउदी भेजा था। रकम तो खर्च हो गई। आमदनी से किस्त जमा हो रही है। राविया के पास चार निर्वाचन कार्ड व चार आधार कार्ड मिला है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियों से कर्ज लेने के दौरान एजेंटों ने ही इन्हें बनवाया था। एजेंट ने शपथ दिलाया था कि किसी को बताना नहीं है। रकम की जरूरत थी। दो हजार रुपये लेकर कार्ड बनवा लिया था। कर्ज लेना था तो खामोश रही। उन्होंने बताया कि कई महिलाओं का ऐसे ही आधार व निर्वाचन कार्ड बनवाकर एजेंटों ने कर्ज दिया है। राबिया के पति के निर्वाचन कार्ड में फर्जीवाड़ा हुआ है। नवी रसूल के नाम पर नूरआलम का निर्वाचन कार्ड बना दिया गया है। एक ही आदमी का फोटो और नाम अलग अलग करके एजेंटों ने कर्ज बांट दिया है। एजेंटों ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए इस तरह का हथकंडा अपनाया है।महिलाओं ने बताया कि एक लोन कराने पर एजेंट दो से पांच प्रतिशत का कमीशन लेते हैं। कमीशन के चक्कर में फर्जीवाड़ा कर महिलाओं को फंसा दिया जाता है। गांव की शकुंतला देवी का तीन-चार निर्वाचन व आधार कार्ड बनाकर एजेंटों ने लोन दे दिया है। इनके आधार कार्ड में अंक अलग-अलग कर दिए गए हैं। गांव की धनावती, रीता, गौरी, कुसमावती, कलावती, आसमा, सुशीला, लालसा, कालिंदी, बरफी ने भी इस तरह की अंधेरगर्दी होने की बात बताई। इन सभी महिलाओं का कहना है कि शिकायत करने से कोई फायदा नहीं है। कर्ज तो आसानी से मिल जा रहा है। एजेंट दबाव बनाते हैं तो समस्या होती है। दिनभर घर के पास ही डटे रहते हैं। कुछ महिलाओं ने कहा कि कर्ज की किस्त समय से जमा होने पर कोई परेशानी नहीं होती है। माली हालत खराब होने पर किस्त रुक जाती है तो एजेंट मानसिक व सामाजिक रूप से परेशान करने लगते हैं।

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