
नेपाल,भारत सिमा संवाददाता जीत बहादुर चौधरी का रिपोर्ट
25/05/2025
काठमाण्डौ,नेपाल — नकली भारतीय नोट कांड में सजा काट चुके बारा जिले के युनुस अन्सारी के खिलाफ पुलिस ने अब मनी लॉन्ड्रिंग (सम्पत्ति शुद्धिकरण) के मामले में भी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के केन्द्रीय अनुसन्धान ब्यूरो (सीआईबी) ने अन्सारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। नख्खु जेल से 6 साल की सजा पूरी कर शनिवार को रिहा हुए अन्सारी को सीआईबी ने उसी दिन हिरासत में लिया।
सीआईबी के एसएसपी होविन्द्र बोगटी ने बताया कि अन्सारी को हिरासत में लेकर अदालत से रिमांड बढ़ाया गया है और अब जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्हें रविवार को अदालत में पेश किया जा रहा है।
उनकी रिहाई से पहले ही सीआईबी ने बुधवार को जेल प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर जांच के लिए उन्हें पेश कराने को कहा था। उसी पत्र के आधार पर अन्सारी को जेल से रिहा होते ही शनिवार को हिरासत में लिया गया।
अन्सारी पहली बार 13 पुस 2066 (28 दिसंबर 2009) को 25 लाख 44 हजार 5 सौ नकली भारतीय नोटों के साथ गिरफ्तार किए गए थे। अगले महीने यानी 17 माघ (31 जनवरी 2010) को उन्हें जेल भेजा गया था। उस समय वे नेशनल टेलीविजन के अध्यक्ष थे। फिर 6 असोज 2067 (22 सितंबर 2010) को जब 40 लाख 91 हजार नकली नोट बरामद हुए, तब भी अन्सारी का नाम सामने आया। इसके बाद उन्होंने करीब 5 साल की सजा पूरी कर 18 असोज 2070 (4 अक्टूबर 2013) को रिहाई पाई थी।
तीसरी बार वे 10 माघ 2070 (24 जनवरी 2014) को फिर से 35 लाख नकली भारतीय रुपये के साथ गिरफ्तार हुए और एक बार फिर सजा काटने के बाद रिहा हुए। चौथी बार 10 जेठ 2076 (24 मई 2019) को त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से 7 करोड़ 67 लाख 94 हजार नकली भारतीय नोटों के साथ गिरफ्तार किए गए।
इसके बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए 6 साल की कैद, 60 हजार रुपये जुर्माना और 1,300 रुपये क्षतिपूर्ति की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने शनिवार को पूरी कर ली।
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, अन्सारी पर सुरक्षा खतरा होने के कारण उन्हें हिरासत के बाहर न रखकर हिरासत में ही पूछताछ की जा रही है। अन्सारी भारतीय आपराधिक गिरोहों के निशाने पर रहे हैं। केन्द्रीय कारागार में सजा काटते समय भी 26 फाल्गुन 2067 (10 मार्च 2011) को भारतीय शूटर मनमीत सिंह उर्फ मनमीत भाटिया ने उन पर गोली चलाकर हत्या का प्रयास किया था।



